छत्तीसगढ़ में असमय मानसून की एंट्री से ‘खेती पर खतरा’

रायपुर

छत्तीसगढ़ में इस साल मई महीने में मानसून के आगमन से किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों को प्री-मानसून में हुई बारिश के चलते पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा. वहीं अब नवतप्पा के प्रभावहीन होने और मानसून की समय से पहले हुई एंट्री से फसल पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. मौसम में अचानक आए बदलाव के बीच प्रदेश में DAP की कमी भी किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति है. इसकी कमी प्रदेश में फिलहाल सियासत का मुद्दा बन गई है.

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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष पारसनाथ साहू ने DAP की कमी को लेकर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दे दी है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मानसून जल्दी आने से किसानों के लिए बिना DAP फसल बोना मुश्किल है. उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द DAP की पूर्ती कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि सरकार DAP की कमी को दूर करे, अन्यथा प्रदेश भर के किसान बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.

वहीं विपक्ष भी लगातार प्रदेश में DAP की कमी को उजागर कर रही है. हालांकि कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अन्य खाद से इसकी कमी की पूर्ति करने की बात कही है.

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इस मुद्दे को लेकर कृषि विशेषज्ञ संकेत ठाकुर ने कहा कि इस मौसम में जैसा बदलाव आ रहा है, उससे इकोसिस्टम भी बदल रहा है. नवतप्पा में सामान्य से 5 डिग्री तापमान बढ़ जाता है, इससे मिट्टी में मौजूद माइक्रोबैक्टीरिया या कीड़े-मकौड़े गर्मी से खत्म हो जाते हैं. लेकिन इस साल गर्मी नहीं पड़ी और मिट्टी में नमी बनी हुई है. इससे किसानों को कीड़े और बीमारियों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने ये भी कहा कि खेतों को जोताई करने का समय नहीं मिला. इसके चलते खर-पतवार बढ़ जाएंगे, जिससे खेती पिछड़ सकती है. ऐसे में उन्होंने किसानों को जल्द से जल्द बीज ,खाद और DAP उपलब्ध कराने की बात कही है.

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अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार किसानों को समय रहते बीच और खाद उपलब्ध करा पाएगी या किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

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